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उस हुस्न-ए-बेमिसाल को देखा न आज तक,
जिस के तसुव्वरात ने जीना सिखा दिया।
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क्या हुस्न था कि आँख से देखा हजार बार,
फिर भी नजर को हसरत-ए-दीदार रह गयी।
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मुझको ये आरज़ू वो उठाएं नक़ाब खुद,
उन को ये इंतज़ार तकाजा करे कोई।
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बचपन में सोचता था चाँद को छू लूँ,
आपको देखा वो ख्वाहिश जाती रही।
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ऐसा ना हो तुझको भी दीवाना बना डाले,
तन्हाई में खुद अपनी तस्वीर न देखा कर।
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ये बेख्याली ये लिबास ये गेसू खुले हुए,
सीखी कहाँ से तुमने ये अदाएं नई नई।
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वो सुर्ख होंठ और उनपर जालिम अंगड़ाईयाँ,
तू ही बता... ये दिल मरता ना तो क्या करता।
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वो कहते हैं हम उनकी झूठी तारीफ़ करते हैं,
ऐ ख़ुदा एक दिन आईने को भी ज़ुबान दे दे।
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मुझे दुनिया की ईदों से भला क्या वास्ता यारो,
हमारा चाँद दिख जाये हमारी ईद हो जाये।
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आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन,
मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है।
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उनको सोते हुए देखा था दमे-सुबह कभी,
क्या बताऊं जो इन आँखों ने शमां देखा था।
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तेरी तारीफ में कुछ लफ्ज़ कम पड़ गए,
वरना हम भी किसी ग़ालिब से कम नहीं।
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एक तो हुस्न बला उस पे बनावट आफत,
घर बिगाड़ेंगे हजारों के संवरने वाले।
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न देखना कभी आईना भूल कर देखो
तुम्हारे हुस्न का पैदा जवाब कर देगा।
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उनके हुस्न का आलम न पूछिये,
बस तस्वीर हो गया हूँ, तस्वीर देखकर।
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बात करने में फूल झड़ते हैं,
बर्क गिरती है मुस्कराने में,
नजरें जैसे फराखदिल साकी
खुम लुढाये मैखाने में।
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जरा उन की शोख़ी तो देखना,
लिए ज़ुल्फ़-ए-ख़म-शुदा हाथ में,
मेरे पास आए दबे दबे,
मुझे साँप कह के डरा दिया।
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उन के रुख पर हया की सुर्खी का,
एक पैगाम आने वाला है,
बस वो घबराये बस वो शरमाये,
अब मेरा नाम आने वाला है।
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ये आईने क्या दे सकेंगे तुम्हें
तुम्हारी शख्सियत की खबर,
कभी हमारी आँखो से आकर पूछो
कितने लाजवाब हो तुम।
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यारो कुछ तो जिक्र करो, उनकी क़यामत बाहों का,
वो जो सिमटते होंगे उनमें, वो तो मर जाते होंगे।
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कसा हुआ तीर हुस्न का,
ज़रा संभल के रहियेगा,
नजर नजर को मारेगी,
तो क़ातिल हमें ना कहियेगा।
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घनी ज़ुल्फों के साये में चमकता चाँद सा चेहरा,
तुझे देखूं तो कुछ रातें सुहानी याद आती हैं।
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हैं होंठ उसके किताबों में लिखी तहरीरों जैसे,
ऊँगली रखो तो आगे पढ़ने को जी करता है।
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हुस्न वालों को संवरने की क्या जरूरत है,
वो तो सादगी में भी क़यामत की अदा रखते हैं।
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मौसम-ए-मिजाज़ गुलज़ार कर गये,
उफ़ वो मुस्कराकर कर्ज़दार कर गये।
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फूल जब उसने छू लिया होगा,
होश तो ख़ुशबू के भी उड़ गए होंगे।
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खुदा जाने किस-किस की ये जान लेगी,
वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी।
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मैं तुम्हारी सादगी की क्या मिसाल दूँ इस सारे जहां में बे-मिसाल हो तुम।
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ढाया है खुदा ने ज़ुल्म हम दोनों पर,
तुम्हें हुस्न देकर मुझे इश्क़ देकर।
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ये शबाब के फ़साने जो मैं दिल से सुन रहा हूँ,
अगर और कोई कहता तो न ऐतबार होता।
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जबीं पर सादगी, नीची निगाहें, बात में नरमी,
मुखातिब कौन कर सकता है तुमको लफ्जे-कातिल से।
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शोख़ी से ठहरती नहीं क़ातिल की नज़र आज,
ये बर्क़-ए-बला देखिए गिरती है किधर आज।
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अच्छे लगे तुम सो हम ने बता दिया,
नुकसान ये हुआ कि तुम मगरूर हो गए।
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वो कुछ मुस्कुराना वो कुछ झेंप जाना,
जवानी अदाएँ सिखाती है क्या क्या।
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अदाएं उनकी दिलों से खेलती हैं,
वो क्या जाने वफ़ा क्या है जफा क्या।
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साथ शोखी के कुछ हिजाब भी है,
इस अदा का कहीं जवाब भी है? 💅💄💋💠👸
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इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा,
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं।
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वो शरमाई सूरत वो नीची निगाहें,
वो भूले से उनका इधर देख लेना।
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लेने न पाए उनकी बलायें बढ़ा के हाथ,
उस बदगुमाँ ने थाम लिए मुस्कुरा के हाथ।
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ऐ सनम जिस ने तुझे चाँद सी सूरत दी है,
उसी अल्लाह ने मुझ को भी मोहब्बत दी है।
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क्यों चाँदनी रातों में दरिया पे नहाते हो,
सोये हुए पानी में क्या आग लगानी है।
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इस डर से कभी गौर से देखा नहीं तुझको,
कहते हैं कि लग जाती है अपनों की नज़र भी।
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पर्दा-ए-लुत्फ़ में ये ज़ुल्म-ओ-सितम क्या कहिए,
हाय ज़ालिम तेरा अंदाज़-ए-करम क्या कहिए।
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तेरी बेझिझक हँसी से न किसी का दिल हो मैला,
ये नगर है आईनों का यहाँ साँस ले संभल के।
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माना हमारे जैसे हजारों हैं शहर में,
तुम जैसी कोई चीज मगर दूसरी कहाँ।
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नहीं भाता अब तेरे सिवा किसी और का चेहरा,
तुझे देखना और देखते रहना दस्तूर बन गया है।
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नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,
कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता।
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हुस्न की ये इन्तेहाँ नहीं है तो और क्या है,
चाँद को देखा है हथेली पे आफताब लिए हुए।
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हमारा क़त्ल करने की उनकी साजिश तो देखो,
गुजरे जब करीब से तो चेहरे से पर्दा हटा लिया।
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तेरा अंदाज़-ए-सँवरना भी क्या कमाल है,
तुझे देखूं तो दिल धड़के ना देखूं बेचैन रहूँ।
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कमसिनी का हुस्न था वो... ये जवानी की बहार,
पहले भी तिल था रुख पर मगर क़ातिल न था।
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कैसे बयान करें सादगी अपने महबूब की,
पर्दा हमीं से था मगर नजर भी हमीं पे थी।
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होश-ए-हालात पे काबू तो कर लिया मैंने,
उन्हें देख के फिर होश खो गए तो क्या होगा।
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